

✒️रोशन मदनकर(उप संपादक)
चंद्रपूर(दि.24मे0:- परिवार, समाज, राष्ट्र, धर्म तथा संस्कृति के उत्थान के लिए कार्य करना किसी एक व्यक्ति का काम नही है , अपितु सभी का उत्तरदायित्व होता है। सभी ने मिलकर काम करना होता है। यह शिक्षा हमें हमारे पुराण आदि ग्रंथ सिखाते हैं। ऐसे विचार चंद्रपुर के आध्यात्मिक चिंतक तथा साहित्यकार मुरलीमनोहरजी व्यास ने प्रतिपादित किये।
श्री पुरुषोत्तम मास प्रित्यर्थ आयोजित श्रीकृष्ण चरित सत्संग समारोह में व्यासजी बोल रहे थे। यह सत्संग श्री परेशचंद्र सरकार के आवास पर 22 मई को आयोजित किया गया।
व्यासजी ने कहा जब धरती और साधु-संत, देवी-देवता दुष्ट प्रवृत्तीयों से त्रस्त होकर प्रभु की शरण गये तब भगवान ने आश्वस्त किया कि, मै धरती पर प्रगट होऊंगा। धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए दुष्टों का संहार करने के लिए आप सभी देवताओं को भी मेरे साथ चलना पडेंगा। भगवान ने देवताओं को निर्देश दिये कौन-कौन, किस नाम से प्रगट होंगे। शेषनाग- बलदेव,लक्ष्मीजी रुक्मिणी बनेंगी, कामदेव – प्रद्युम्न, ब्रह्माजी – अनिरुद्ध, धर्मराज – युधिष्ठीर, पवन देव – भिम आदि सभी देवता विविध रुप लेकर कार्य करेंगे।
व्यासजी ने कहा भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं जब-जब धर्म की हानी होती है तब-तब मै प्रगट होता हूँ ,परित्राणाय साधुनाम् । साधु पुरुषों की रक्षा करने तथा दुष्टों के विनाश के लिए मै प्रगट होता हूँ।
एकमात्र भगवान श्रीकृष्ण ही कहते हैं, मामेकं शरणं ब्रज। सब कुछ छोड कर मेरी शरण में आओ। सभी पुराण आदि ग्रंथों में प्रमाण मिलते है कि, जो-जो लोग श्रीकृष्ण की शरण गये वे सुखी होगये। श्रीकृष्ण आनंद स्वरुप है।
व्यासजी ने कहा श्रीमद् भागवत कथा तथा सभी संतों का कहना है केवल श्रीकृष्ण ही शरण लेने योग्य है।
शांतिरंजन सरकार तथा सौ लिपीका सरकार ने व्यासजी का स्वागत किया।







