Home चंद्रपूर भक्ति के बगैर भगवान नही मिलते।-मुरलीमनोहरजी व्यास का प्रतिपादन।

भक्ति के बगैर भगवान नही मिलते।-मुरलीमनोहरजी व्यास का प्रतिपादन।

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✒️रोशन मदनकर(उप संपादक)

चंद्रपूर(दि.30मे):-कुछ लोग कहते है भगवान है क्या ? हमें भगवान दिखाओ तो जाने। हमारे वे लोग यह नही जानते कि, भक्ति बगैर भगवान नही मिलते। यह बात वेद, पुराण आदि सभी ग्रंथ कहते है। हमारे शास्त्र ही नही अन्य सभी धर्मों के ग्रंथ भी यही बात कहते है। ऐसे विचार चंद्रपुर के आध्यात्मिक चिंतक तथा साहित्यकार मुरलीमनोहरजी व्यास ने प्रतिपादित किये।

     श्री गोवर्धननाथजी हवेली चंद्रपुर में पुरुषोत्तम मास की पद्मजा कमला एकादशी दि 27 मई को आयोजित एकादशी सत्संग समारोह में व्यासजी बोल रहे थे। 

   अपने विषय को गति प्रदान करते हुये व्यासजी ने सुरदासजी के एक पद “अरे मन सोच विचार ” को उद्घृत करते हुये कहा सुरदासजी कहते है, भक्ति बिना भगवंत दुर्लभ है। भक्ति संत पुरुषों के साथ से ही प्राप्त हो सकती है। हम काम, क्रोध, लोभ मोह के जंजाल में फंसे हुये है।घर में सुंदर पत्नी, बच्चों के मोह में लगे हुये है। सूरदासजी कहते है अपने मन को समझाओ की मन भक्ति में लगे। मन को भक्ति में लगाने के लिए सुरदास आदि संतों के पदों का गायन किया जाना चाहिए। 

ण व्यासजी ने कहा पुरुषोत्तम मास का अनन्य महत्व है। इस महिने में अधिकाधिक भक्ति करनी चाहिए। साथ ही इस महिने की दोनों एकादशीयों का अनन्य महत्व है। इस दिन तीर्थसेवन अथवा अपने क्षेत्र की नदी में स्नान करके भगवान लक्ष्मीनारायण की पूजा करके दान करने से अक्षय पुण्यलाभ होता है।

   हवेली के मुखीयाजी विजय भट्ट ने आरती उतारी। बड़ी संख्या में दर्शनोर्थियों की उपस्थिती रही।

   श्री गोवर्धननाथ हवेली में प्रत्येक एकादशी को संध्या समय शयन दर्शन में मुरलीमनोहरजी व्यास का सत्संग होता है।